पुलिस हिरासत में पिटाई से मौत के मामले में इंस्पेक्टर समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा

बेग्या पवार

करीब 15 साल, 1 महीना, 23 दिन बाद पारधी समुदाय के एक परिवार को न्याय मिला है। चोर समझकर पुलिस वालों ने एक युवक को इतना मारा था कि वह मर गया। अब इसी मामले में रिसोड पुलिस थाने के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक (PI) समेत 9 पुलिसकर्मियों को बुधवार, 1 जुलाई 2026 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह फैसला वाशिम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया।

सजा पाने वालों में तत्कालीन थाना प्रभारी महादेव माणिक धांडे के अलावा पुलिसकर्मी मदन केशव पवार, शिवाजी नामदेव खिल्लारी, पंजाब माणिकराव पाटकर, रमेश सीताराम पवार, प्रकाश हिरालाल तारम, नागोराव भगवान खांडके, अशोक निवृत्ति वैद्य और वसंत कणिराम जाधव शामिल हैं।

मृतक बेग्या पवार हिंगोली जिले के सेनगांव तहसील के बढ़ोणा गांव के पारधी समाज से थे। 9 मई 2011 को रिसोड पुलिस ने एक मामले की जांच के सिलसिले में बढ़ोणा के खेत क्षेत्र से बेग्या पवार और राजू पवार को हिरासत में लिया था। पुलिस थाने लाने के बाद मामले का खुलासा कराने के लिए पुलिस ने बेग्या पवार की बेरहमी से पिटाई की। अगले दिन 10 मई 2011 को उनकी मौत हो गई। हिरासत में पिटाई से हुई मौत के बाद दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई।

इस घटना के विरोध में वाशिम जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर मोर्चा निकाला गया। सभी स्तरों से बढ़ते दबाव के बाद मामले की जांच राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के पुलिस उपाधीक्षक अनवर शेख और चव्हाण को सौंपी गई। सीआईडी ने 34 दिनों तक जांच करने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत विशेष अत्याचार का मामला दर्ज किया।

जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया। अब अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयसिंग झपाटे ने फैसला सुनाते हुए नौ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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